“मेरा प्रिय मित्र कहाँ चला गया?”
“मेरा प्रिय मित्र कहाँ चला गया?” – सी. आचार्य उसने मुझे पानी दिया, एक छोटे कटोरे में, जो काफी था तैरने और नहाने में। निहारता था मुझे वो, खिड़की के उस पार से, इस तरह छुपकर, कि मैं डर न जाऊँ उसे देख के। वो पानी मीठा लगता था, पर अब हो गया है कड़वा। कटोरा अब खाली है, उसकी साँसों की कमी है। मेरी टेरें अनसुनी हैं। क्या तुम्हे ये पता हे, मेरा प्रिय मित्र कहाँ चला गया हे? मेरा प्रिय मित्र कहाँ चला गया हे? (A haunting tribute to people who lost someone special. For me its birds and frogs.)