समंदर का पानी

"समंदर का पानी" - सी. आचार्य
​
समंदर का पानी,
ये कितना है सारा,
इसमें तैर तो सके हैं,
लेकिन पी ना सके हैं।
​
तेरी होंठों की लाली,
है एक प्यार का इशारा,
इसमें खो तो सके हैं,
लेकिन छू ना सके हैं।

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