धर्म


धर्म - सी. आचार्य
बाढ़, कुछ लाशों को तैराती है,
यहाँ डूबती हुई कश्तियाँ भी हैं।
परिंदे, जो साथ नहीं ले जा पाते,
अपने पूरे कुनबे को।
और हाँ, गिरजाघर, मस्जिदें और मंदिर,
पानी में तैरते नहीं हैं।
गर्मी हो या सर्द मौसम,
ढलती शाम हो या सुनहरा पहर,
इस कैद के खुलने या बंद होने के बीच,
तैरते, उजड़ते आशियानों के बीच,
और हाँ लेकिन, गिरजाघर, मस्जिदें और मंदिर,
इसके पहुँच से बाहर हैं।

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