Aasman aur Samandar Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps May 14, 2025 "आसमान और समंदर"- सि. आचार्य ऐ समंदर, तू आसमां बन जा, और आसमां, तू समंदर। दिन में हे मछली गिरती, रात में हे जलपरी। ज़मीन में हे तारे और टूटते, चाँद को देख सब घबराते। भगवान ने हमें ही भेजा, हमने ये क्या कर दिया? Read more